Gurukul की स्थापना ग्रामीण अंचल में शिक्षा के प्रचार प्रसार व वैदिक सभ्यता संस्कृति का संदेश घर-घर तक पहुॅचाने के उद्देश्य से समस्त क्षेत्रवासियों के सहयोग से गुरुकुल का शिलान्यास 22 अक्टूबर 2007 को हुई।
माता निर्माता भवति के अनुसार शिक्षित व संस्कारित कन्यायें ही समाज व राष्ट्र का निर्माण कर सकती है। इसी भावना से प्रेरित व संकल्पित होकर बहन रश्मि आर्या जो छत्तीसगढ की रहने वाली है जिन्होने जीवन पर्यन्त ब्रहम्चारिणी रहने की प्रतिज्ञा ली है। तथा अपना भरा-पूरा परिवार छोडकर आर्य जगत में गुरुकुल की सेवा में पूर्ण रूपेण तन मन से लगी हुई है। आपके परिश्रम की क्षेत्र में एक विशेश छवि है।
आपकी शैक्षिक योग्यता एम.ए. संस्कृत, एम.ए. समाजशास्त्र तथा बी.एड है। आपको आर्यसमाज की प्रसिद्ध समाजसेवी संगठन “सार्वदेशिक” से “सेवाश्रमरत्न” की उपाधि से एवं मानव सेवा प्रतिष्ठान (दिल्ली) द्धारा उत्कृष्ट समाज सेवा हेतु राम दास इतवारिया सम्मान से सम्मानित उत्तर प्रदेश सरकार द्धारा चलाई गयी महिला शिक्षा सुरक्षा अभियान के अन्तर्गत मलाला मेरठ से भी सम्मानित किया गया।.